गुरुवार, 6 जून 2019

अदालत का नजरिया

क्या आवासीय परिसरों को अधिवक्ताओं के कार्यालय के लिए उपयोग किया जा सकता है?

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शनिवार, 6 अप्रैल 2019

सोमवार, 21 जनवरी 2019

लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर संकट सन्निकट है-व्यास

2014 से देश मे श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार चल रही है।अभी हाल ही में पांच राज्यो में विधानसभा चुनाव हुए।बीजेपी को मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में सत्ता से हाथ धोना पड़ा।विगत वर्षों हुए उप चुनावो में भी बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा।यूपी में गोरखपुर ,फूलपुर की हार ने बीजेपी नेतृत्व को हिला दिया अंदर तक।क्यो की गोरखपुर 1977 से बीजेपी का अभेद दुर्ग रहा जिसे बसपा सपा गठबंधन ने आसानी से भेद दिया।आज बीजेपी की सहयोगी पार्टियां चुनाव नजदीक आते ही अपने तेवर दिखाने लग गई है।आसाम तक मे बीजेपी अपनी ही नीतियों से परेशानी में आ गई है।दूसरी ओर गोरखालेण्ड क्षेत्र में भी बीजेपी अपनी ही हठ धर्मिता,अहंकारी नीति से तखलीफ़ में है।शिवसेना,तेलगूदेशम, एडीएमके,जैसी पार्टियों ने पहले ही किनारा कर लिया है।दूसरी ओर क्षेत्रीय पार्टियों ने स्थानीय स्तर पर समझोते कर  के भी बीजेपी को कमजोर करना शुरू कर दिया है।यूपी,बिहार,महाराष्ट्र,हरियाणा,झारखंड,बंगाल,उड़ीसा,कर्नाटक,तमिलनाडु, केरल, सहित कई राज्यो में बीजेपी काफी नुकसान में रहेगी।गुजरात,एमपी,राजस्थान, पंजाब में भी बहुत कुछ खोयेगी ही।
  आज हम समीक्षा करें तो पाएंगे कि किसान,मजदूर,दस्तकार,छात्र,मध्यम वर्ग तक  नाखुश है। सरकारी नीतियों से।किसानों को फसल का लाभकारी मूल्य न मिलना, फसल बीमा के नाम पर ठगी,कर्जे से दबा किसान वर्ग चिंतित कर रहा है बीजेपी नेताओं को।भ्रस्टाचार आज कोई नया मुद्दा नही है।फिर भी बीजेपी नेताओं के ओर भ्रस्टाचार के रिस्तो पर बहस हो रही है।
    बीजेपी संघ परिवार द्वारा अपने विरोधियों को राष्ट्रद्रोही कहना आम बात हो गई है।उग्र हिन्दूत्व की आड़ लेकर संघ परिवार देश समाज को हिन्दू मुस्लिम में बांट कर अपने वोट बैंक को मजबूत करना चाहेगी।पर अब पहले जैसे हालात नही है।स्वर्ण आरक्षण भी बीजेपी को ज्यादा फायदा नही दिला पायेगा।एसटीएससी कानून को कठोर कर के भी दलित वर्ग में सहानूभूति की लहर नही चला पा रही बीजेपी।
   गो हत्या की आड़ में भीड़ की आड़ लेकर दलित,मुस्लिम समाज पर किये हमलों को लोग नही भूले है।लव जेहाद,3 तलाक ने भी वोटों के धुव्रीकरण को प्रभावित किया है।
   आज बीजेपी विरोधी संगठित हो रहे है।और बीजेपी के पक्षधर बचाव की मुद्रा में।ये है 2019 के चुनाव का परिद्रश्य।लोगो की भावनाओ को समझे तो लग जायेगा कि बीजेपी का सत्ता में आना नामुमकिन सा हो गया है।
  तीसरे मोर्चे की भी 200 सीटे तक आने का अनुमान लगा रहे विश्लेषक।

शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

भीड़ तंत्र हावी हो रहा है लोक तंत्र पर-व्यास

2014 में मोदी जी के नेतृत्व में वो सरकार बनी जो हिन्दुसभा की पृष्ठभूमि में पली बढ़ी।संघ परिवार देश को हिन्दूराष्ट्र बनाने के लिए जायज नाजायज सब तरीके अपनाता रहा है।आजादी से पहले तक संघ परिवार ने कोई उल्लेखीय आजादी के आंदोलन में भूमिका नही निभा सका।वह जाने अनजाने में अंग्रेजो के नापाक इरादों को ही कामयाब बनाता रहा।कांग्रेस,क्रांतिकारी नेताओ,कम्युनिष्ठों से भी कभी नही जुड़ा।केवल निराशा हताशा की ही राजनीति करता रहा।मुस्लिम लीग ओर हिन्दु महासभा दोनों ही दल सम्प्रदायवादी राजनीति में लगे रहे।दोनों ही दल द्विराष्ट्रवाद की अवधारणा पर ही आचरण व्यवहार करते रहे।आखिर दिनों ही दल भारत के विभाजन को नही रोक पाए।वो चाहते भी थे कि देश हिन्दूराष्ट्र ओर मुस्लिम राष्ट्र अलग अलग हो जाये।अंग्रेज भी यही चाहते थे।आजादी के पहले हिंदू और मुस्लिम आबादी भारत मे निर्णायक ताकत थी।जिसे अंग्रेजो ने विभाजित किया ओर मुस्लिम लीग ओर हिन्दू महासभा संघ सब उनके नापाक इरादों को नही समझ पाए।आज तक भी नही समझ पा रहे है।आज भी भीड़ की आड़ लेकर लोकतांत्रिक ताने बाने,संस्कृति,संस्थाओं पर हमले करवा रहे है।आज सब कुकर्म भीड़ की आड़ में हो रहे है।हिन्दू मुस्लिम कार्ड,गाय गंगा,राम मंदिर,धारा 370,लव जिहाद सब काम भीड़ की आड़ में किये जा रहे है।कानून के शासन को धत्ता बताकर अपने विभाजनकारी एजेंडे पर संघ परिवार काम कर रहा है।सरदार पटेल को राजनीति में अपने स्वार्थ के लिए घसीट रहे है।जबकि सब जानते हैकि संघ सरदार पटेल के विचारो का विरोधी रहा है।सावरकर की विचारधारा के लोग सरदार पटेल के भक्त होने का स्वांग कर रहे है। 2019 में निर्णायक होगा।या तो भीड़तंत्र हावी होगा या उखड़ जाएगा।