बुधवार, 27 मई 2020
खुले बाजार की अर्थव्यवस्था ने हमे बर्बाद कर दिया है-व्यास
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सोमवार, 25 मई 2020
आज में जीये तब ही भविष्य उज्जवल नही तो अन्धकारमय-व्यास
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रविवार, 24 मई 2020
जीना है तो मरना सीखो ,कदम कदम पे लड़ना सीखो -व्यास
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सुख और दुख से ऊपर उठा आनंद ही आएगा-व्यास
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क्या दुनिया में दुःख कभी नहीं रहा ?तो इसको लेकर ये विलाप क्यों-व्यास
आज हम क्या मानते है दुनिया में दुःख कभी नहीं रहा है ?दुःख हर युग हर काल खंड में रहा है, सत युग में भी राजा हरीश चंद्र जी को घोर दुःख झेलने पड़े थे त्रेता में श्री राम चंद्र जी को भी घोर दुःख आपतियो कष्टों को सहना पड़ा द्वापर में भी श्रीं कृष्ण जी को राण...
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आभार - GyanApp
शुक्रवार, 22 मई 2020
विश्वास के बिना रिस्तो की कोई कीमत नही-व्यास
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बुधवार, 20 मई 2020
मन बदले तो, दुनिया बदले -व्यास
*मन पर बुध्दि का नियंत्रण कर हम इस दुनिया में अच्छा स्वास्थ्य हासिल करेंगे-व्यास*
आज तक दुनिया में मन की गति को कोई व्यक्ति नहीं जान पाया है मन को भी इन्द्रीय ही मन गया है, मन काम वासना से लेकर कल्याणकारी परोपरी विचारो तक में भ्रमण करता रहता है, मन की गति सूर्य की गति से भी तेज हो सकती है, कहते है मन तीनो लोको में कुछ क्षणमात्र में घूम आता है मन अति चंचल है काम, क्रोध लोभ, मोह, मद आलस्य सब ही मन में पैदा होते है और तिरोहित भी हो जाते है, सतो तमो रजो गुण इस मन से जुड़े विषय गन है अपराधी भी ये ही मन बनता है और अपराधी से कवि और संत तक भी ये ही मन बना देता है तब ही तो बालिया भील से महर्षि वाल्मीकि हो गए और दुनिया में रामायण जैसा महाकाव्य दिया जो संस्कृत साहित्य की धरोहर है बुध्दि ही हमें क्या करना है और क्या नहीं करना है का ज्ञान देती है जिसकी बुद्धि वैज्ञानिक पद्दति से संचालित होती है, वो व्यक्ति भावुक नहीं होगा !और निर्णय क्या क्यों कैसे किस लिए पर विचार कर ही लेगा ऐसे निर्णय लगभग गलत नहीं होंगे जो व्यक्ति दुसरो पर आश्रित होगा वो भेद चल चलेगा और कभी खड़े में गिर सकता है अंधविश्वासी खतरनाक व्यक्ति होते है जो कुतर्क करते ही है क्यों की उनका ज्ञान दूना सुनाया है वो शास्त्रों और संतो की वाणी का उदहारण देंगे पर खुद का अनुभव शून्य !!ऐसे लोग ही समस्या की जड़ होते है .मन बुद्धि और संस्कार को बदले दुनिया तो खुद ही बदलेगी !!
*अपने शुभचिंतकों को फॉरवर्ड करें।*
आभार - GyanApp
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