सोमवार, 13 अगस्त 2018
सोमवार, 25 जून 2018
आज फिर संविधान,लोकतंत्र विरोधी शक्तियां अपनी ताकत आजमाईश पर आमादा है-व्यास
आज ही के दिन 1975 में आपातकाल लगा था 43 साल बीत गए।पर मेरी स्मृतियों से वो वक्त आज भी विस्मृत नही हुआ है।मैं हिंदी का डिबेटर था।मुझे डिबेट के बजाय इंदिरा गांधी की उपलब्धियों पर भाषण देने को कहा गया।मैने इंदिरा राज की एक उपलब्धि आपात भी गिना दी।फिर क्या था।मुझे पूँछतांछ के लिए रोका गया।भाषण किसने लिखा?मैने का बिल्डज़ पढ़ता हूँ।तो जनता हूँ।देश की वास्तविकता को।तब अब तक मैं निरंतर सत्ता,प्रशासन,शक्ति द्वारा किये जा रहे न्याय,शोषण,अत्याचार,मनमाने पन, नादिरशाही,पदीय स्थिति के दुरुपयोग ओर मानवाधिकार हनन का विरोध कर रहा हूँ।आज देश को फिर से जातीय,साम्प्रदायिक,क्षेत्रीयता,भाषाई, मत मतान्तर की आड़ में पूंजीवादी,संविधान विरोधी शक्तियों द्वारा विभाजित करने का संगठित प्रयास किया जा रहा है।आईये मेरा मन कहता है कि फिर"संविधान,लोकतंत्र, मानवाधिकार,न्याययुक्त समाज बनाने की लड़ाई शुरू करने का वक्त आ गया है।अंग्रजो ने देश के ही लोगों को हिन्दू मुस्लिम,दलित स्वर्ण,अगड़ा पिछड़ा में विभाजित किया था।उन्ही की चालो से देश विभाजित भी हुआ।विभाजन के बाद भी नफ़रत की राजनीति दोनों ओर कम नही हुई बढ़ी ही है।क्या जर्मनी ,कोरिया की तरह फिर एका नही कर सकते है ?आज हम बाजारवादी कॉरपोरेट दुनिया विभाजित कर रही है।और हम उनके झाल में फसते ही जा रहे है।सोचो ओर कुछ ऐसा करोबकी लोग हमें हितालरवादी न कहे बल्कि लोकतंत्र,सँविधान समर्थक कहे।
शुक्रवार, 22 जून 2018
जातिवादी,सम्प्रदायवादी मानसिकता हमे विरासत में मिली थी-व्यास
आज हिन्दूओ में भी दलित पिछड़ो ओर स्वर्ण वर्ग के बीच आरक्षण की आड़ में तनाव और अविश्वास का माहौल बढ़ा ही है।आदिवासियो में भी राजस्थान विशेष में भील गरासियों ओर मीणो में तनाव और उपद्रव तक का माहौल रहा था।सत्तारूढ़ ओर
विपक्ष दोनों इनके हितेषी बनकर आग में घी डालने का ही काम करते रहे। किसी ने
जिम्मेदाराना व्यवहार और संजीदा आचरण नही किया।आज जातिवादी,संप्रदायवादी
खरनाक दौर में पहुँच गई है।आज प्रेस तक जातीय सम्प्रदायवादी सोच चिंतन से ग्रसित है।कथित सामाजिक संगठन सामाजिक न होकर जातीय या सम्प्रदायवादी बनकर रह गए है।
शहीद भगतसिंह जी की विचारधारा तो विलुप्त ही हो गई है।आज जोड़ तोड़ की राजनीति को ही सभी पक्ष महत्व दे रहे है।शिक्षा के व्यवसायीकरण में आदमी को पैसा कमाने की महज़ मशीन बनाकर रख दिया है।सहिष्णुता समाप्त प्रायः ही हो गई है।
मंगलवार, 10 अक्टूबर 2017
स्थाई लोक अदालत ओर जन उपयोगी सेवाए-व्यास
स्थाई लोक अदालत आज त्वरित,सस्ता,सुलभ न्याय का विनम्र प्रयास है।विधिक सेवा प्राधिकरण का-व्यास
सोमवार, 7 नवंबर 2016
विधिक् जागरूकता
आज विधिक जागरूकता,साक्षरता अभियान लोगों के दिलो में बैठ जाना चाहिए।कानून की जानकारियां न होना, भी दुर्भाग्यपूर्ण ही है।अधिकारों ,दायित्वों की जानकारियां व् कौन से कार्य अपराध है ये कानूनों से ही ज्ञात होता है।यहाँ तक सुप्रीम कोर्ट,हाई कोर्ट तक के फैसले भी कानून बन जाते है।नशा, हिंसा,अश्लीलता आज अपराधों को जन्म दे रही है।लाभ की संस्कृति ने इंसान को हैवान बना दिया है।वो रिस्तो,नातो, प्यार ,वफ़ा,जिम्मेदारियों सब तो त्याग देता है।तुच्छ स्वार्थो के लिए।कानून का राज कायम हो ,ये भी मकसद है।कानूनी साक्षरता अभियान का।
जोगो उठो,जिम्मेदार नागरिक बनो। भ्रस्टाचार की गंगोत्री भी कानून ,योजनाओं की जानकारियां न होना। आप जुड़े कानूनी साक्षरता अभियान से।शिष्ठ नागरिक बने।और बनाये
कानूनी साक्षरता क्यों ?
आज केवल कानून बना देने से काम नही चलेगा।कानून के प्रति मन सम्मान भी तो जरुरी है।कई कानून जनता के दबाव में तो कई जरुरत के हिसाब से भी बनते है।कानूनी साक्षरता अभियान भी वक्त का तकाजा है।राजस्थान के 32 जिलों में कानूनी साक्षरता अभियान जिला साक्षरता समितियो के माध्यम से चलाया जा रहा है।6 से 12 नवम्बर तक विधिक सेवा प्राधिकरण के नेतृत्व में देश भर में कानूनी जागरूकता,साक्षरता अभियान चलाया जा रहा है।हम सामाजिक कार्यकर्ताओ का दायित्व है कि कानून के राज को कायम कराने का आंदोलन चलाना होगा।न्याय पूर्ण समाज बनाने के लिए भी आवश्यक है कि वो कानून बने जो समाज व् व्यक्तियों में समतायुक्त समाज बनाने का संकल्प पैदा करे।