मंगलवार, 10 अक्टूबर 2017
स्थाई लोक अदालत ओर जन उपयोगी सेवाए-व्यास
सोमवार, 7 नवंबर 2016
विधिक् जागरूकता
आज विधिक जागरूकता,साक्षरता अभियान लोगों के दिलो में बैठ जाना चाहिए।कानून की जानकारियां न होना, भी दुर्भाग्यपूर्ण ही है।अधिकारों ,दायित्वों की जानकारियां व् कौन से कार्य अपराध है ये कानूनों से ही ज्ञात होता है।यहाँ तक सुप्रीम कोर्ट,हाई कोर्ट तक के फैसले भी कानून बन जाते है।नशा, हिंसा,अश्लीलता आज अपराधों को जन्म दे रही है।लाभ की संस्कृति ने इंसान को हैवान बना दिया है।वो रिस्तो,नातो, प्यार ,वफ़ा,जिम्मेदारियों सब तो त्याग देता है।तुच्छ स्वार्थो के लिए।कानून का राज कायम हो ,ये भी मकसद है।कानूनी साक्षरता अभियान का।
जोगो उठो,जिम्मेदार नागरिक बनो। भ्रस्टाचार की गंगोत्री भी कानून ,योजनाओं की जानकारियां न होना। आप जुड़े कानूनी साक्षरता अभियान से।शिष्ठ नागरिक बने।और बनाये
कानूनी साक्षरता क्यों ?
आज केवल कानून बना देने से काम नही चलेगा।कानून के प्रति मन सम्मान भी तो जरुरी है।कई कानून जनता के दबाव में तो कई जरुरत के हिसाब से भी बनते है।कानूनी साक्षरता अभियान भी वक्त का तकाजा है।राजस्थान के 32 जिलों में कानूनी साक्षरता अभियान जिला साक्षरता समितियो के माध्यम से चलाया जा रहा है।6 से 12 नवम्बर तक विधिक सेवा प्राधिकरण के नेतृत्व में देश भर में कानूनी जागरूकता,साक्षरता अभियान चलाया जा रहा है।हम सामाजिक कार्यकर्ताओ का दायित्व है कि कानून के राज को कायम कराने का आंदोलन चलाना होगा।न्याय पूर्ण समाज बनाने के लिए भी आवश्यक है कि वो कानून बने जो समाज व् व्यक्तियों में समतायुक्त समाज बनाने का संकल्प पैदा करे।
बुधवार, 12 अक्टूबर 2016
स्वतंत्र विचार
आज विचार भी बंधुआ हो गए है।दलगत राजनीति इस कदर हावी है कि स्वतंत्र विचार ही दुर्लभ हो गए है।मिडिया भी जिसका पैसा उसकी पैरवी।आज कॉर्पोरेट मिडिया से कैसे उम्मीद कर सकते है वो कॉर्पोरेट के खिलाफ वास्तविक तथ्य भी सामने लायेगा।आजादी के आंदोलन में भी मिडिया सांप्रदायिक,उग्र,पूंजीपरस्त,अग्रेजो का हित पोशाक रहा है।आज की सरकार पूंजीवादी सरकार है।इससे कैसा उम्मीद करे की ये मजदूर,किसानों ,वंचित वर्ग में कानून व् नीतियां बनाएंगी ?
बुधवार, 4 मई 2016
रविवार, 4 अक्टूबर 2015
मरूस्थलीकरण व सुखे से नीजात ठोस संकल्प से ही सम्भव है :व्यास
५०० किलो मीटर लम्बी लूणी नदी के क्षैत्र मे केवल चरागाह विकसित करके हम वहां के जन जीवन मे एक सुकून पैदा कर पाते।
चीन इझराईल की तकनीक से भी हम मरूस्थल को बांध सकते है।पाकिस्थान सरकार का सहयोग भी ज़रूरी है।मरूस्थलीकरण को रोकने मे। क्यो कि मरूस्थल को रोकना आज एक अहम मुद्दा है, जहां का तापमान गर्मियों के दिनों में 60 डिग्री सेल्शियस तह रहता है और सर्दी के दिनों में 0 डिग्री से नीचे भी तापमान जाता है। मरूस्थल में मीलों दूर तक कई गांव नजर नहीं आते है। यहां के लोगों का जीवन बहुत विकट एवं विपरित परिस्थितियों से जुझने वाला है। मरूस्थल के लोगों का मुख्य व्यवसाय पशुपालन है। यहां का मुख्य पशु ऊंट, भेड, बकरी, गाय एवं बैल है। यहां की वनस्पति कीकर, टींट, फोकड, खेजडी, रोहिडा है। यहां के मुरूस्थल में सांप बिच्छु व अन्य जहरीले कीडे पाये जाना आम बात है। प्राकृतिक एवं मानवीय गतिविधियों ने इस क्षेत्र को मरूस्थल में तब्दील कर दिया है, जबकि कहा जाता है कि यहां पर समुद्र हुआ करता था, और सरस्वती नदी के अवशेष भी मौजूद है। इसी मरूस्थल में 20 प्रमुख खनिज एवं 9 अन्य खनिज निकाले जाने से जमीने खराब हो गई है एवं वनस्पति विलुप्त पर्याय हो गई है। 58 प्रतिशत राजस्थान में केवल रेत के टीले ही पाये जाते है। मुरूस्थल पर नियंत्रण करने के लिए पेडों की पट्टियां लगाना जरूरी है। दो पट्टियों के बीच में चरागाह को विकसित किया जाने से पशुधन को एवं वहां के जनजीवन को बचाया जाना संभव है। 5 टन प्रति हैक्टेयर जो भूमि का कटाव आज जारी है उसको रोकने के लिए केवल पेडों की दीवारनुमा पट्टी खडी कर के ही बढ़ते हुए मरूस्थल पर नियंत्रण कायम किया जा सकता है साथ ही पशुधन एवं जनजीवन को भी बचाया जा सकता है। आज तो मरूस्थल लोगों के लिए कुरूक्षेत्र के युद्ध की मैदान की तरह दिख रहा है और इस युद्ध में धर्म जीतेगा या न जीतेगा यह वक्त ही बतायेगा।