शुक्रवार, 22 जून 2018

जातिवादी,सम्प्रदायवादी मानसिकता हमे विरासत में मिली थी-व्यास

आज भारतीय समाज मे जातीय,संप्रदायवादी मानसिकता विकसित की जा रही है।पिछले 4 साल में हिन्दू मुस्लिमो में नफ़रत ओर अविश्वास का माहौल वोट के खातिर विकसित ही किया गया बल्कि पल्लवित पोषित भी किया गया जा रहा है।देश के अल्पसंख्यको पर सामान्य आचार संहिता के नाम पर बहुसंख्यक रीतिरिवाज,प्रथाओं,मान्यताओं को थोपने का प्रयास किया जा रहा है।
    आज हिन्दूओ में भी दलित पिछड़ो ओर स्वर्ण वर्ग के बीच आरक्षण की आड़ में तनाव और अविश्वास का माहौल बढ़ा ही है।आदिवासियो में भी राजस्थान विशेष में भील गरासियों ओर मीणो में तनाव और उपद्रव तक का माहौल रहा था।सत्तारूढ़ ओर
विपक्ष दोनों इनके हितेषी बनकर आग में घी डालने का ही काम करते रहे। किसी ने
 जिम्मेदाराना व्यवहार और संजीदा आचरण नही किया।आज जातिवादी,संप्रदायवादी
खरनाक दौर में पहुँच गई है।आज प्रेस तक जातीय सम्प्रदायवादी सोच चिंतन से ग्रसित है।कथित सामाजिक संगठन सामाजिक न होकर जातीय या सम्प्रदायवादी बनकर रह गए है।
 शहीद भगतसिंह जी की विचारधारा तो विलुप्त ही हो गई है।आज जोड़ तोड़ की राजनीति को ही सभी पक्ष महत्व दे रहे है।शिक्षा के व्यवसायीकरण में आदमी को पैसा कमाने की महज़ मशीन बनाकर रख दिया है।सहिष्णुता समाप्त प्रायः ही हो गई है।

मंगलवार, 10 अक्टूबर 2017

स्थाई लोक अदालत ओर जन उपयोगी सेवाए-व्यास

स्थाई लोक अदालत आज त्वरित,सस्ता,सुलभ न्याय का विनम्र प्रयास है।विधिक सेवा प्राधिकरण का-व्यास

विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम की धारा 22 बी के अंतरगत जन उपयोगी सेवाओ से असंतुष्ट व्यक्तियों को त्वरित,सुलभ,सस्ता न्याय उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।विधायिका ने,देश भर में स्थाई लोक अदालते यातायात(सड़क,रेल,वायु,जल )जिसमे पेसेंजर ओर माल दोनों को शामिल किया गया है।डाक,तार संचार,बैक बीमा,वितीय संस्थानो को शामिल किया है,ऊर्जा से जुड़े संस्थान विभाग,सड़क (ग्राम पंचायत से राष्ट्रीय राज मार्गो को शामिल करते हुए,सार्वजनिक साफ सफाई,कचरे का निस्तारण,अस्पताल,डिस्पेंसरीज,लेबोरेट्रीज,ई एस आई अस्पताल और नीजि,सरकारी कॉपरेटिव संस्थान जो ये सेवाए देते है शामिल करते हुए।रियल स्टेट,हाउसिंग बोर्ड,यूआई टी, नगर पालिका,परिषदें, शिक्षण संस्थान, से असंतुष्ट व्यक्तियों को समझाईश से या गुण दोष के आधार जरिये निर्णय न्याय का प्रयास कर रही है।स्थाई लो अदालते 1 करोड़ तक के मामलों से निस्तारण में सक्षम है।कोई अपील नही।कोई कोर्ट फीस नही,कोई परिवाद में तकनीकियां नही।सीधे सरल भाषा मे परिवाद तैयार करे ओर स्वयं या प्रतिनिधि के माध्यम से पेश करे।3 माह निर्णय संभव,न्याय भी ऐसे की सभी संतुष्ट हो। आप यदि सामाजिक सक्रिय कार्यकर्ता है तो जडिये विधिक जागरूकता अभियान ओर कानूनी साक्षरता से ओर वंचित वर्ग को समानता के आधार पर संक्षम सेवाओ लाभान्वित कराइये।प्रत्येक गांव में कानूनी साक्षरता ओर जागरUकट केंद्र खोलिए ओर न्याय दिलाने में भगीरथ प्रयास का हिस्सा बनिये। रास्थान में1•50 लाख से कम आय वाले व्यक्ति फ्री लीगल एड में निशुल्क वकील की सुविधा प्राप्त करिये।महिलाएँ, बालक,कैदी, एसटी एससी, अन्य पर आय सीमा नही।
  आप स्थाई लोक अदालत या प्रि लिटिगेशन कोर्ट की सेवाएं ले और दिलाए।आप लोगों के मूल अधिकारों की रक्षा जो त्वरित न्याय भी है का लाभ दिलाए।

सोमवार, 7 नवंबर 2016

विधिक् जागरूकता

आज विधिक जागरूकता,साक्षरता अभियान लोगों के दिलो में बैठ जाना चाहिए।कानून की जानकारियां न होना, भी दुर्भाग्यपूर्ण ही है।अधिकारों ,दायित्वों की जानकारियां व् कौन से कार्य अपराध है ये कानूनों से ही ज्ञात होता है।यहाँ तक सुप्रीम कोर्ट,हाई कोर्ट तक के फैसले भी कानून बन जाते है।नशा, हिंसा,अश्लीलता आज अपराधों को जन्म दे रही है।लाभ की संस्कृति ने इंसान को हैवान बना दिया है।वो रिस्तो,नातो, प्यार ,वफ़ा,जिम्मेदारियों सब तो त्याग देता है।तुच्छ स्वार्थो के लिए।कानून का राज कायम हो ,ये भी मकसद है।कानूनी साक्षरता अभियान का।
जोगो उठो,जिम्मेदार नागरिक बनो। भ्रस्टाचार की गंगोत्री भी कानून ,योजनाओं की जानकारियां न होना। आप जुड़े कानूनी साक्षरता अभियान से।शिष्ठ नागरिक बने।और बनाये

कानूनी साक्षरता क्यों ?

आज केवल कानून बना देने से काम नही चलेगा।कानून के प्रति मन सम्मान भी तो जरुरी है।कई कानून जनता के दबाव में तो कई जरुरत के हिसाब से भी बनते है।कानूनी साक्षरता अभियान भी वक्त का तकाजा है।राजस्थान के 32 जिलों में कानूनी साक्षरता अभियान जिला साक्षरता समितियो के माध्यम से चलाया जा रहा है।6 से 12 नवम्बर तक विधिक सेवा प्राधिकरण के नेतृत्व में देश भर में कानूनी जागरूकता,साक्षरता अभियान चलाया जा रहा है।हम सामाजिक कार्यकर्ताओ का दायित्व है कि कानून के राज को कायम कराने का आंदोलन चलाना होगा।न्याय पूर्ण समाज बनाने के लिए भी आवश्यक है कि वो कानून बने जो समाज व् व्यक्तियों में समतायुक्त समाज बनाने का संकल्प पैदा करे।

बुधवार, 12 अक्टूबर 2016

स्वतंत्र विचार

आज विचार भी बंधुआ हो गए है।दलगत राजनीति इस कदर हावी है कि स्वतंत्र विचार ही दुर्लभ हो गए है।मिडिया भी जिसका पैसा उसकी पैरवी।आज कॉर्पोरेट मिडिया से कैसे उम्मीद कर सकते है वो कॉर्पोरेट के खिलाफ वास्तविक तथ्य भी सामने लायेगा।आजादी के आंदोलन में भी मिडिया सांप्रदायिक,उग्र,पूंजीपरस्त,अग्रेजो का हित पोशाक रहा है।आज की सरकार पूंजीवादी सरकार है।इससे कैसा उम्मीद करे की ये मजदूर,किसानों ,वंचित वर्ग में कानून व् नीतियां बनाएंगी ?

रविवार, 4 अक्टूबर 2015

मरूस्थलीकरण व सुखे से नीजात ठोस संकल्प से ही सम्भव है :व्यास

आजादी के बाद हर बज़ट व्यवस्थाओं मे थार के मरूस्थल पर नियन्त्रण का निर्णय लिया।आज २लाख वर्ग किलो मीटर मे फैला थार हमे ललकारता है।दम है तो मुझे बांधो।लूणी नदी घाटी योजना को भी सही तरीके से लागू कर दिया जाता तो थार के लोगो ,वनस्पति, मवेशियों शायद सुकून मिल जाता।
५०० किलो मीटर लम्बी लूणी नदी के क्षैत्र मे केवल चरागाह विकसित करके हम वहां के जन जीवन मे एक सुकून पैदा कर पाते।
चीन इझराईल की तकनीक से भी हम मरूस्थल को बांध सकते है।पाकिस्थान सरकार का सहयोग भी ज़रूरी है।मरूस्थलीकरण को रोकने मे। क्यो कि मरूस्थल को रोकना आज एक अहम मुद्दा है, जहां का तापमान गर्मियों के दिनों में 60 डिग्री सेल्शियस तह रहता है और सर्दी के दिनों में 0 डिग्री से नीचे भी तापमान जाता है। मरूस्थल में मीलों दूर तक कई गांव नजर नहीं आते है। यहां के लोगों का जीवन बहुत विकट एवं विपरित परिस्थितियों से जुझने वाला है। मरूस्थल के लोगों का मुख्य व्यवसाय पशुपालन है। यहां का मुख्य पशु ऊंट, भेड, बकरी, गाय एवं बैल है। यहां की वनस्पति कीकर, टींट, फोकड, खेजडी, रोहिडा है। यहां के मुरूस्थल में सांप बिच्छु व अन्य जहरीले कीडे पाये जाना आम बात है। प्राकृतिक एवं मानवीय गतिविधियों ने इस क्षेत्र को मरूस्थल में तब्दील कर दिया है, जबकि कहा जाता है कि यहां पर समुद्र हुआ करता था, और सरस्वती नदी के अवशेष भी मौजूद है। इसी मरूस्थल में 20 प्रमुख खनिज एवं 9 अन्य खनिज निकाले जाने से जमीने खराब हो गई है एवं वनस्पति विलुप्त पर्याय हो गई है। 58 प्रतिशत राजस्थान में केवल रेत के टीले ही पाये जाते है। मुरूस्थल पर नियंत्रण करने के लिए पेडों की पट्टियां लगाना जरूरी है। दो पट्टियों के बीच में चरागाह को विकसित किया जाने से पशुधन को एवं वहां के जनजीवन को बचाया जाना संभव है। 5 टन प्रति हैक्टेयर जो भूमि का कटाव आज जारी है उसको रोकने के लिए केवल पेडों की दीवारनुमा पट्टी खडी कर के ही बढ़ते हुए मरूस्थल पर नियंत्रण कायम किया जा सकता है साथ ही पशुधन एवं जनजीवन को भी बचाया जा सकता है। आज तो मरूस्थल लोगों के लिए कुरूक्षेत्र के युद्ध की मैदान की तरह दिख रहा है और इस युद्ध में धर्म जीतेगा या न जीतेगा यह वक्त ही बतायेगा।